Gold Price: सोने की कीमतों में भारी उछाल से बदली खरीदारी की आदत, पुरानी जूलरी के एक्सचेंज का बढ़ा चलन
नई दिल्ली। सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय से जारी तेजी का असर अब ग्राहकों की खरीदारी की आदतों पर भी दिखाई देने लगा है। महंगे सोने के कारण ग्राहक नई जूलरी खरीदने के लिए पहले से पैसा जमा करने वाली एडवांस परचेज स्कीम की तुलना में पुरानी जूलरी को एक्सचेंज कर नई जूलरी खरीदने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। जूलर्स के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में कई प्रमुख जूलरी कंपनियों के यहां एडवांस परचेज स्कीम के तहत जमा होने वाली रकम में लगातार दूसरे साल गिरावट दर्ज की गई है।

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वहीं दूसरी तरफ, पुराने सोने के एक्सचेंज के जरिए जूलरी खरीदने का चलन तेजी से बढ़ा है। जूलर्स का कहना है कि सोने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने ग्राहकों के व्यवहार में बदलाव किया है। अब कई ग्राहक अपनी पुरानी जूलरी को बेचने या एक्सचेंज करने के विकल्प को नई खरीदारी के मुकाबले ज्यादा बेहतर मान रहे हैं।
Gold Price: एडवांस परचेज स्कीम में जमा रकम घटी
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट लीडर टाइटन की तनिष्क चेन में एडवांस परचेज स्कीम के तहत जमा रकम वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 2,116 करोड़ रुपये रह गई। यह पिछले साल की तुलना में करीब 39 फीसदी कम है। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में भी इस रकम में 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
इसी तरह रिलायंस रिटेल की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, एडवांस परचेज स्कीम के तहत जमा रकम में सालाना आधार पर 25 फीसदी की कमी आई और यह करीब 250 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2024-25 में भी इसमें 4.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
दक्षिण भारत में 67 स्टोर संचालित करने वाली कंपनी Jos Alukkas के यहां भी पिछले वित्त वर्ष में जमा रकम में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई। इससे पहले कंपनी के स्तर पर यह गिरावट लगभग 5 फीसदी थी।
Gold Price: पुराने सोने के एक्सचेंज को मिल रही प्राथमिकता
सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों का रुझान पुराने सोने को एक्सचेंज कर नई जूलरी खरीदने की तरफ बढ़ा है। जूलर्स के मुताबिक, जब सोना लगातार महंगा हो रहा हो तो ग्राहक नई जूलरी के लिए पूरी रकम खर्च करने के बजाय घर में रखे पुराने सोने को इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में एक्सचेंज स्कीम के जरिए खरीदारी में सालाना आधार पर 35 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली। Jos Alukkas के एमडी वर्गीस अलुक्कास के अनुसार, सोने की कीमतों में भारी उछाल ने भारत में सोना खरीदने की आदत को बदल दिया है।
कंपनी के कारोबार में भी पुराने सोने के एक्सचेंज की भूमिका बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में Jos Alukkas की बिक्री में पुराने सोने के एक्सचेंज का योगदान बढ़कर करीब 65 फीसदी हो गया, जबकि एक साल पहले यह लगभग 45 फीसदी था।
Gold Price: सोने की कीमतों में 56 फीसदी तक उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में सोने की कीमतों में लगभग 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद पिछले वित्त वर्ष में सोने की कीमतों में करीब 56 फीसदी का उछाल आया। कीमतों में इतनी बड़ी तेजी ने ग्राहकों के खरीदारी के तरीके को प्रभावित किया।
जब सोना अपेक्षाकृत सस्ता था, तब ग्राहक भविष्य में जूलरी खरीदने के लिए एडवांस परचेज स्कीम में हर महीने रकम जमा करते थे। लेकिन कीमत बढ़ने के बाद ग्राहकों के लिए पुराने सोने को एक्सचेंज करके नई जूलरी लेना अधिक आकर्षक विकल्प बन गया।
टाइटन की सालाना रिपोर्ट में भी पिछले वित्त वर्ष के दौरान गोल्ड एक्सचेंज के जरिए बिक्री में बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। वहीं कल्याण जूलर्स के अनुसार, रीसाइकल किए गए सोने का हिस्सा बढ़कर 46 फीसदी हो गया है।
जूलरी कारोबार में एक्सचेंज का बड़ा योगदान
कल्याण जूलर्स के मुताबिक, पुरानी जूलरी के बदले नई जूलरी लेने से इंडस्ट्री के रेवेन्यू का करीब एक-तिहाई हिस्सा आता है। इसका मतलब है कि पुराने सोने का एक्सचेंज अब जूलरी कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
वहीं DP आभूषण ने अप्रैल में अपनी एडवांस परचेज स्कीम शुरू की थी। कंपनी के कारोबार में पुराने सोने के एक्सचेंज की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 25 से 30 फीसदी बताई गई है। DP ग्लोबल के प्रमोटर विकास कटारिया ने भी कहा कि गोल्ड एक्सचेंज में निश्चित रूप से तेजी आई है।
PM मोदी की अपील का भी असर?
सोने की होल्डिंग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणियों का भी इस बदलते ट्रेंड पर कुछ हद तक असर माना जा रहा है। जूलरी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, ग्राहकों के बीच पुराने सोने को इस्तेमाल में लाने और उसे एक्सचेंज करने का रुझान बढ़ा है।
हालांकि, जूलर्स का कहना है कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण सोने की कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी है। कीमतों में तेजी के कारण ग्राहक अपनी खरीदारी की रणनीति बदल रहे हैं और घर में मौजूद पुराने सोने को नई जूलरी खरीदने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
आगे भी जारी रह सकता है ट्रेंड
जूलर्स का अनुमान है कि जब तक सोने की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक पुराने सोने के एक्सचेंज का चलन जारी रह सकता है। दूसरी ओर, एडवांस परचेज स्कीम में जमा रकम में दबाव बना रह सकता है।
एडवांस परचेज स्कीम जूलर्स के लिए वर्किंग कैपिटल का एक जरिया भी होती है और ग्राहकों को भविष्य में जूलरी खरीदने के लिए हर महीने रकम जमा करने की सुविधा देती है। लेकिन महंगे सोने के दौर में ग्राहक अब इस मॉडल की जगह अपनी पुरानी जूलरी को एक्सचेंज कर नई खरीदारी करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस तरह सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने सिर्फ जूलरी की लागत ही नहीं बढ़ाई, बल्कि ग्राहकों के खरीदारी के तरीके को भी बदल दिया है। एडवांस बुकिंग से लेकर पुराने सोने के एक्सचेंज तक, बाजार में ग्राहकों की प्राथमिकताएं अब सोने की कीमतों के हिसाब से तेजी से बदलती नजर आ रही हैं।















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