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Silver Import Curbs: चांदी के आयात पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती

Silver Import Curbs: सरकार ने चांदी पर अपनी बंदिशें बढ़ा दी हैं। इसे लेकर एक आदेश जारी हुआ है। इसके तहत चांदी की स‍िल्‍ल‍ियों के आयात की स्थिति को ‘मुक्‍त’ से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ कर दिया गया है। यह फैसला तत्‍काल प्रभाव से लागू है। इसका मकसद कीमती धातुओं के आयातों पर निगरानी को कड़ा करना है।

Silver Import Curbs: चांदी के आयात पर सरकार की सख्ती: नए नियमों से क्या बदलेगा? 

Silver Import Curbs

भारत सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर नियंत्रण को और सख्त करते हुए चांदी की सिल्लियों (Silver Bullion) के आयात नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से चांदी की सिल्लियों के आयात की स्थिति को ‘मुक्त’ (Free) से बदलकर ‘प्रतिबंधित’ (Restricted) श्रेणी में डाल दिया है। इसका मतलब यह है कि अब चांदी का आयात पहले की तरह आसानी से नहीं हो सकेगा और इसके लिए विशेष अनुमति या लाइसेंस की जरूरत पड़ सकती है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना रही हैं। सरकार का मानना है कि सोना और चांदी जैसे गैर-आवश्यक आयातों को नियंत्रित करके आर्थिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

Silver Import Curbs: सरकार ने क्यों बढ़ाई सख्ती?

हाल के महीनों में सोने और चांदी के आयात में तेजी देखने को मिली है। खासतौर पर सोने के आयात ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि मात्रा के लिहाज से इसमें गिरावट आई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण आयात मूल्य काफी ऊपर चला गया।

सरकार को चिंता है कि अत्यधिक आयात से देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है। जब आयात ज्यादा और निर्यात कम होता है तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं।

इसी कारण सरकार अब कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है।

Silver Import Curbs: चांदी की सिल्लियों पर क्या बदला?

सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार अब चांदी की सिल्लियों का आयात ‘मुक्त’ श्रेणी में नहीं रहेगा। पहले व्यापारी सामान्य प्रक्रिया के तहत चांदी आयात कर सकते थे, लेकिन अब इस पर नियंत्रण बढ़ा दिया गया है।

‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में आने का मतलब यह है कि आयातकों को अब अतिरिक्त अनुमति, लाइसेंस या सरकारी मंजूरी लेनी पड़ सकती है। इससे सरकार को यह निगरानी करने में आसानी होगी कि कितनी मात्रा में चांदी देश में आ रही है और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर ज्वेलरी उद्योग, निवेश बाजार और औद्योगिक उपयोग पर पड़ सकता है। चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषणों में ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई उद्योगों में भी होता है।

Silver Import Curbs: सोने के आयात पर भी सख्त नियम

Silver Import Curbs

सरकार ने सिर्फ चांदी ही नहीं बल्कि सोने के आयात पर भी कड़े नियम लागू किए हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ (AA) स्कीम के तहत सोने के आयात की अधिकतम सीमा 100 किलो तय कर दी है।

इस योजना के तहत निर्यातक कंपनियां कच्चा माल आयात कर तैयार उत्पाद विदेशों में बेचती हैं। लेकिन अब सरकार ने इसमें कई नई शर्तें जोड़ दी हैं।

Silver Import Curbs: पहली बार आवेदन करने वालों के लिए नए नियम

अगर कोई कंपनी पहली बार ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ के लिए आवेदन करती है, तो उसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन अनिवार्य होगा। अधिकारी यह जांच करेंगे कि फैक्ट्री वास्तव में मौजूद है या नहीं, उसकी उत्पादन क्षमता कितनी है और वह सक्रिय रूप से काम कर रही है या नहीं।

निर्यात प्रदर्शन से जुड़ेगा अगला लाइसेंस

सरकार ने यह भी तय किया है कि अगला आयात लाइसेंस तभी मिलेगा जब पिछली अनुमति के तहत तय निर्यात दायित्व का कम से कम 50 प्रतिशत पूरा किया जा चुका हो।

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयात का उपयोग वास्तव में निर्यात बढ़ाने के लिए हो, न कि केवल घरेलू बाजार में बिक्री के लिए।

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हर दो हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

निगरानी को मजबूत करने के लिए सरकार ने आयातकों पर नई रिपोर्टिंग व्यवस्था भी लागू की है। अब ‘एडवांस ऑथराइजेशन’ स्कीम के तहत आयात करने वाली कंपनियों को हर पखवाड़े यानी दो सप्ताह में एक बार परफॉर्मेंस रिपोर्ट जमा करनी होगी।

यह रिपोर्ट किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रमाणित करानी होगी। इसमें आयात और निर्यात से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी। इससे सरकार को रियल टाइम में डेटा मॉनिटर करने में मदद मिलेगी।

आयात शुल्क भी बढ़ाया गया

सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। इसके अलावा इन धातुओं के आयात पर 3 प्रतिशत IGST भी लगाया गया है।

इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में सोना और चांदी दोनों महंगे हो सकते हैं। इससे ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

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क्या होगा असर?

सरकार के इन फैसलों का सबसे बड़ा उद्देश्य गैर-जरूरी आयातों को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है। हालांकि, उद्योग जगत का मानना है कि अत्यधिक नियंत्रण से कारोबार प्रभावित हो सकता है।

ज्वेलरी सेक्टर, जो भारत के बड़े निर्यात क्षेत्रों में से एक है, अब ज्यादा निगरानी और नियमों के दायरे में आ जाएगा। वहीं आम ग्राहकों को आने वाले समय में सोना-चांदी की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार फिलहाल आर्थिक संतुलन बनाए रखने और आयात-निर्यात व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

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