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These 6 states of India are ahead in child birth: भारत में तेजी से घट रही प्रजनन दर

These 6 states of India are ahead in child birth: भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2024 में 2.1 से घटकर 1.9 हो गई है। छह राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में टीएफआर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है। दिल्ली में सबसे कम टीएफआर 1.2 है, इसके बाद केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 1.3 है। जब टीएफआर 2.1 होती है, तो इसे प्रतिस्थापन स्तर कहा जाता है।

These 6 states of India are ahead in child birth: घट रही प्रजनन दर, 6 राज्यों में अब भी ज्यादा जन्मदर

These 6 states of India are ahead in child birth

भारत में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार अब धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है। नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) 2024 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पहले 2.1 था। विशेषज्ञों के अनुसार 2.1 की टीएफआर को “प्रतिस्थापन स्तर” माना जाता है। यानी एक महिला औसतन इतने बच्चे पैदा करती है कि अगली पीढ़ी में जनसंख्या संतुलित बनी रहे।

अब भारत में केवल छह राज्य ऐसे बचे हैं जहां प्रजनन दर अभी भी प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर है। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। बाकी अधिकांश राज्यों में जन्मदर तेजी से नीचे आई है। इससे आने वाले वर्षों में देश की जनसंख्या संरचना, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

These 6 states of India are ahead in child birth: दिल्ली में सबसे कम प्रजनन दर

These 6 states of India are ahead in child birth

रिपोर्ट के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली में सबसे कम प्रजनन दर दर्ज की गई है। यहां टीएफआर केवल 1.2 है। इसका मतलब यह है कि दिल्ली में एक महिला औसतन सिर्फ 1.2 बच्चों को जन्म दे रही है।

दिल्ली के बाद केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में टीएफआर 1.3 दर्ज की गई है। ये राज्य लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और महिला सशक्तिकरण में आगे रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर शिक्षा, शहरीकरण, बढ़ती जीवनशैली लागत और महिलाओं के करियर पर ध्यान देने की वजह से इन राज्यों में जन्मदर लगातार कम हो रही है।

These 6 states of India are ahead in child birth: छह राज्यों में अब भी ज्यादा बच्चे पैदा हो रहे

देश के छह बड़े राज्यों में अभी भी जन्मदर अपेक्षाकृत ज्यादा बनी हुई है। बिहार इस सूची में सबसे ऊपर है। यहां टीएफआर 2.9 दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी जन्मदर प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर बनी हुई है। इन राज्यों में ग्रामीण आबादी ज्यादा है और कई क्षेत्रों में अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच सीमित है। यही वजह है कि यहां जनसंख्या वृद्धि की गति अभी धीमी नहीं हुई है।

These 6 states of India are ahead in child birth: बिहार में सबसे कम गिरावट

रिपोर्ट में पिछले एक दशक के आंकड़ों की तुलना भी की गई है। इसमें पता चला कि बिहार में प्रजनन दर में सबसे कम गिरावट आई है।

2012-14 के दौरान बिहार की टीएफआर 3.2 थी, जो 2022-24 में घटकर 2.9 हुई। यानी लगभग 9.4 प्रतिशत की ही कमी दर्ज की गई।

इसी तरह छत्तीसगढ़ और असम में भी गिरावट की रफ्तार धीमी रही। छत्तीसगढ़ में लगभग 11.5 प्रतिशत और असम में करीब 13 प्रतिशत की कमी देखी गई है। इससे साफ है कि इन राज्यों में अभी भी परिवार बड़े हैं और जनसंख्या वृद्धि जारी है।

दक्षिण भारत में तेजी से घट रही जन्मदर

दक्षिण भारत के राज्यों में प्रजनन दर सबसे तेजी से कम हुई है। तमिलनाडु और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में पहले ही जन्मदर कम थी, लेकिन पिछले दशक में यहां और ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

तमिलनाडु में टीएफआर में लगभग 23.5 प्रतिशत और दिल्ली में करीब 29.4 प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों और विकसित राज्यों में बच्चों की परवरिश का खर्च बढ़ने, करियर प्राथमिकता और छोटे परिवार की सोच के कारण यह बदलाव तेजी से हुआ है।

बच्चों की आबादी में भी बड़ा अंतर

जिन राज्यों में प्रजनन दर कम हो चुकी है, वहां बच्चों की आबादी का प्रतिशत भी घट गया है।

तमिलनाडु में 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग की जनसंख्या केवल 18 प्रतिशत रह गई है। वहीं बिहार में यही आंकड़ा 31.5 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि बिहार जैसे राज्यों में युवा और बच्चों की आबादी बहुत ज्यादा है, जबकि दक्षिण भारत में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है।

आंध्र प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी बच्चों की आबादी करीब 19 प्रतिशत के आसपास है। पूरे भारत की बात करें तो देश की लगभग 24 प्रतिशत आबादी 0-14 वर्ष आयु वर्ग में आती है।

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भारत के लिए अभी भी सुनहरा अवसर

हालांकि जन्मदर में गिरावट चिंता का विषय मानी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास अभी भी “डेमोग्राफिक डिविडेंड” यानी जनसांख्यिकीय लाभ का बड़ा मौका मौजूद है।

देश की कामकाजी उम्र की आबादी लगातार बढ़ रही है। 15 से 59 वर्ष आयु वर्ग के लोग अब भारत की कुल आबादी का 66.4 प्रतिशत हिस्सा हैं। 2014 में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत था।

वहीं 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की आबादी अभी 10 प्रतिशत से कम है। इसका मतलब यह है कि आने वाले वर्षों में भारत के पास बड़ी कार्यशील आबादी होगी, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

भविष्य में क्या होंगे असर?

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर प्रजनन दर लगातार इसी तरह घटती रही तो भविष्य में भारत को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कम जन्मदर से बुजुर्ग आबादी बढ़ेगी और काम करने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे घट सकती है। जापान और कई यूरोपीय देशों में पहले से ऐसी स्थिति देखी जा रही है।

हालांकि फिलहाल भारत के पास युवा आबादी का बड़ा आधार मौजूद है। यदि सरकार रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सही तरीके से काम करती है तो भारत दुनिया की सबसे मजबूत कार्यशील अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।

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