रीवा नगर निगम क्षेत्र में जहां यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है, वहीं यातायात पुलिस की कार्रवाई आम जनता के लिए मुसीबत बनती दिखाई दी। शहर के बाहर यातायात पुलिस ने अचानक घेराबंदी कर ऑटो चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। रीवा शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ऑटो संचालन पर रोक लगा दी गई, जबकि पीटीएस के पास केवल एक मार्ग खोला गया। जैसे ही ऑटो उस मार्ग से गुजरने लगे, वैसे ही यातायात पुलिस ने सभी ऑटो को रोक लिया और जांच के नाम पर कार्रवाई शुरू कर दी। इस कार्रवाई का सीधा असर ऑटो सवार यात्रियों पर पड़ा। ऑटो में सवार कई लोग इलाज के लिए अस्पताल जा रहे थे, वहीं महिलाओं, छोटे बच्चों और स्कूली छात्राओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मजबूरी में यात्रियों को पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ी। घंटों तक कार्रवाई चलती रही, लेकिन यात्रियों की समस्या सुनने वाला कोई नहीं था। ऑटो चालक जहां अपने सभी दस्तावेज पूरे होने की बात कह रहे थे, वहीं यातायात पुलिस का तर्क था कि चालक वर्दी में नहीं थे, जिसको लेकर पहले भी हिदायत दी जा चुकी है। यातायात पुलिस का कहना है कि अब नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और वर्दी को लेकर ही विशेष कार्रवाई की जा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि व्यवस्था सुधारने की जगह क्या कार्रवाई का बोझ आम जनता पर डालना सही है? फिलहाल इस कार्रवाई के बाद रीवा में यातायात सुधार की बजाय अव्यवस्था और नाराजगी ज्यादा नजर आई, जिसमें सबसे ज्यादा परेशान मरीज और आम लोग हुए।
रीवा में ऑटो चालकों पर सख्ती का असर यात्रियों पर पड़ा भारी, मरीज और स्कूली बच्चे घंटों रहे परेशान















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