मऊगंज गैंगरेप केस में बड़ा एक्शन (Police Action) — फरार आरोपियों पर इनाम घोषित
मऊगंज सामूहिक दुष्कर्म मामला: एक साल बाद तेज हुई कार्रवाई, 4 मार्च की डेडलाइन पर टिकी नजर
मऊगंज जिले में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में लगभग एक वर्ष की लंबी अवधि के बाद अब पुलिस-प्रशासन सक्रिय मोड में दिखाई दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों की सजा बरकरार रखने के बावजूद दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे, जिससे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे।
अब मामले में नई हलचल तब देखने को मिली जब जिले के पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने फरार आरोपियों — विधायक प्रतिनिधि इंद्रपाल सिंह और शराब कारोबारी राजू उर्फ नृपेंद्र सिंह परिहार — पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। साथ ही दोनों को 4 मार्च 2026 तक हर हाल में न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर दिया गया है।
न्यायालय के निर्देश और पुलिस की कार्रवाई
द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश हीरालाल अलाव के निर्देश पर लौर थाना पुलिस ने बीते सप्ताह दोनों आरोपियों के फरार होने की उद्घोषणा करते हुए गांव-गांव पोस्टर चस्पा किए। आरोपी ग्राम खुजवा के निवासी हैं और पिछले एक वर्ष से “घोषित फरार” थे

मऊगंज गैंगरेप केस में बड़ा एक्शन (Police Action) — फरार आरोपियों पर इनाम घोषित
हैरानी की बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी लंबे समय तक ठोस गिरफ्तारी कार्रवाई सामने नहीं आई। इसी वजह से यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई और संभावित दबावों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया।
राजनीतिक विवादों में घिरा मामला
प्रकरण उस समय और संवेदनशील हो गया जब दोषी इंद्रपाल सिंह को देवतालाब विधायक गिरीश गौतम द्वारा विधायक प्रतिनिधि बनाए जाने पर सवाल उठे। वहीं दूसरे आरोपी राजू उर्फ नृपेंद्र सिंह परिहार को शराब ठेका मिलने का मामला भी जांच के दायरे में आया।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठे कि चरित्र सत्यापन के बावजूद ठेका कैसे मिला और इसमें आबकारी विभाग की भूमिका क्या रही। इन पहलुओं ने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से बेहद विवादित बना दिया।
स्थानीय लोगों के आरोप और बढ़ते सवाल
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि पीड़ित पक्ष लगातार आरोपियों की लोकेशन बताता रहा, लेकिन उसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली और संभावित राजनीतिक दबाव को लेकर चर्चाएं तेज रही
जनता के बीच कई सवाल लगातार उठते रहे —
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क्या आरोपियों को सत्ता का संरक्षण मिला हुआ था?
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क्या यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है?
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई?
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी
बीते एक वर्ष से यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से लोगों में नाराजगी और असंतोष बढ़ता गया।
एसपी का दो टूक बयान
1️⃣ मऊगंज गैंगरेप केस में बड़ा एक्शन (Police Action) — फरार आरोपियों पर इनाम घोषित
2️⃣ एक साल बाद प्रशासन एक्टिव (Law Enforcement) — 4 मार्च तक सरेंडर की डेडलाइन
3️⃣ सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद सख्ती (Justice Update) — गिरफ्तारी की तैयारी तेज
4️⃣ फरार दोषियों की तलाश तेज (Manhunt) — गांव-गांव चस्पा हुए पोस्टर
5️⃣ मऊगंज केस में नया मोड़ (Breaking News) — SP का सख्त बयान
6️⃣ राजनीतिक विवादों के बीच कार्रवाई (Political Angle) — आरोपी पर इनाम घोषित
7️⃣ कानून की पकड़ मजबूत (Law & Order) — पुलिस का दबाव बढ़ा
8️⃣ 4 मार्च पर टिकी निगाहें (Deadline) — सरेंडर या गिरफ्तारी तय
9️⃣ जनता के सवाल, पुलिस की कार्रवाई (Public Reaction) — जांच तेज
🔟 लंबे इंतजार के बाद एक्शन (Big Development) — प्रशासन हुआ सख्त
एसपी दिलीप सोनी ने स्पष्ट कहा है कि न्यायालय के आदेश का पालन हर हाल में कराया जाएगा और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी और इनाम दिया जाएगा।
अब 4 मार्च पर टिकी निगाहें
अब पूरे जिले की नजर 4 मार्च 2026 पर टिकी है। या तो आरोपी आत्मसमर्पण करेंगे या फिर पुलिस बड़े स्तर पर गिरफ्तारी अभियान चलाएगी।
करीब एक साल से सुर्खियों में बने इस मामले में अब कानून की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि प्रशासनिक सख्ती कितनी प्रभावी साबित होती है और न्याय की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है।














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