रीवा जच्चा-बच्चा मौत मामला:रीवा जच्चा-बच्चा मौत मामला: धरना स्थल पहुंचे दिग्विजय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग तेज
रीवा: संजय गांधी अस्पताल में 26 अगस्त को हुई प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से चल रहे धरना-प्रदर्शन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह देर रात धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में आगे की रणनीति और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा हुई।

रीवा जच्चा-बच्चा मौत मामला:
धरना स्थल पर मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने रीवा के संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों में सामने आए स्वास्थ्य संबंधी मामलों का भी जिक्र किया।
रीवा जच्चा-बच्चा मौत मामला: संजय गांधी अस्पताल को लेकर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, डिप्टी सीएम और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल हैं। उन्होंने संजय गांधी अस्पताल के पुराने विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्रीनिवास तिवारी के समय अस्पताल का विस्तार हुआ था।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि आज विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल की स्थिति खराब है। उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों और विभाग की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
छिंदवाड़ा के कफ सिरप मामले का भी किया जिक्र
मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने छिंदवाड़ा के कथित कफ सिरप मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि फार्मेसी से जुड़े नियमों का पालन नहीं होने के कारण अमानक कफ सिरप का इस्तेमाल होता रहा और इससे करीब 26 बच्चों की मौत हुई।

छिंदवाड़ा के कफ सिरप मामले का भी किया जिक्र
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया था और उन्होंने भी 11 अगस्त को पत्र लिखा था। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इन घटनाओं की जवाबदेही किसकी है।
हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों और मौतों से जुड़े सभी तथ्यों का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही होगा।
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला भी उठाया
दिग्विजय सिंह ने बालाघाट के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां बैगा और अनुसूचित जाति के बड़ी संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हैं और करीब 30 बच्चों की मौत हुई है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने इस मामले को भी उठाया था और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल किए थे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में 11 अगस्त को पत्र भी लिखा था।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कल्पना मिश्रा की मौत पर क्या बोले दिग्विजय सिंह?
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में हुई प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें धरना स्थल पर आने के बाद मृतका के इलाज से जुड़ी कुछ जानकारी मिली।
उनके मुताबिक, कल्पना मिश्रा इलाज को लेकर चिंतित थीं और कथित तौर पर अस्पताल में इलाज नहीं कराने की बात कह रही थीं। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया और बाद में उनकी मौत हो गई।
उन्होंने अस्पताल में जिंदा मरीज को मृत घोषित किए जाने के मामले का भी जिक्र किया और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें दिग्विजय सिंह के बयान और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े मामलों को एक साथ जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और अस्पताल में चूहों द्वारा बच्चों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
दिग्विजय सिंह ने सवाल किया कि जब स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों ने मिलकर यह धरना जनता की आवाज और जनहित की लड़ाई के लिए शुरू किया है।
मृतका के पिता भी धरने पर बैठे
जच्चा-बच्चा मौत मामले में मृतका कल्पना मिश्रा के पिता भी रीवा में धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल इस्तीफा दें।
परिजनों की ओर से यह आरोप भी लगाया गया था कि कांग्रेस का कोई बड़ा नेता उनसे मिलने नहीं पहुंचा। इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है और यह धरना उन्हीं के लिए है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल राजनीतिक रूप देने के बजाय मृतका के परिवार के साथ खड़ी है और पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा उठा रही है।
इस्तीफे की मांग पर अड़े दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने छिंदवाड़ा और बालाघाट के मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया और बाद में मामला बढ़ने पर कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि रीवा का यह मामला सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और उसकी जवाबदेही से जुड़ा सवाल है।
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि कांग्रेस की यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल इस्तीफा नहीं दे देते।
कांग्रेस की आगे की रणनीति पर चर्चा
धरना स्थल पर दिग्विजय सिंह ने आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। इस दौरान आगे के आंदोलन और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति को लेकर चर्चा हुई।
कांग्रेस लगातार जच्चा-बच्चा मौत मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। वहीं, इस पूरे मामले में जांच और प्रशासन की ओर से सामने आने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला अब राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। कांग्रेस के धरने के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पहुंचने से आंदोलन को और धार मिली है।
दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई मामलों का जिक्र करते हुए सरकार और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर निशाना साधा और उनके इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, जच्चा-बच्चा मौत मामले में मृतका के परिवार की ओर से भी कार्रवाई और जवाबदेही की मांग जारी है।
नोट: इस खबर में दिग्विजय सिंह और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों को आरोप/बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। संबंधित मामलों में अंतिम तथ्य जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही तय होंगे।













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