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Consumer Court: सुनार को 32 ग्राम सोना लौटाने का आदेश, ₹35 हजार मुआवजा भी; जानें पूरा मामला

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Consumer Court: 32 ग्राम सोना लेकर नई अंगूठी नहीं बनाई, सुनार को 60 दिन में सोना लौटाने का आदेश, ₹35 हजार मुआवजा भी

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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ग्राहक की शिकायत पर सुनार को 32 ग्राम सोना वापस करने और ग्राहक को मानसिक परेशानी व मुकदमे के खर्च के लिए कुल ₹35,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने यह आदेश उस मामले में दिया, जिसमें ग्राहक का आरोप था कि उसने पुराना सोना नई अंगूठी बनवाने के लिए सुनार को दिया, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो अंगूठी मिली और न ही उसका सोना वापस किया गया।

मामले में ग्राहक द्वारा पेश की गई रसीद को अहम सबूत माना गया। उपभोक्ता आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सोना वापस न करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।

Consumer Court:  क्या है 32 ग्राम सोने का पूरा मामला?

Consumer Court: मामला हिमाचल प्रदेश के पालमपुर क्षेत्र का बताया गया है। शिकायतकर्ता राज कुमार ने कपूर ज्वैलर्स के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।

जानकारी के अनुसार, 1 सितंबर 2023 को राज कुमार ने सुनार को 32 ग्राम वजन की दो पुरानी सोने की चूड़ियां दी थीं। ग्राहक के अनुसार, इन चूड़ियों के सोने को पिघलाकर करीब 40 ग्राम वजन की नई अंगूठी तैयार की जानी थी।

सुनार की ओर से ग्राहक को करीब दो महीने में नई अंगूठी तैयार करके देने का भरोसा दिया गया था।

लेकिन तय समय बीतने के बाद ग्राहक को नई अंगूठी नहीं मिली।

Consumer Court:  दो महीने की जगह बीत गए दो साल

ग्राहक के अनुसार, दो महीने पूरे होने के बाद जब उसने सुनार से संपर्क किया तो उसे अलग-अलग कारण बताकर मामले को टाला जाता रहा।

समय गुजरता गया, लेकिन न तो नई अंगूठी तैयार करके दी गई और न ही ग्राहक का पुराना सोना वापस किया गया।

इस बीच ज्वैलरी कारोबार से जुड़े एक पुराने मालिक का वर्ष 2024 में निधन हो गया। इसके बाद परिवार के सदस्यों ने दुकान का कारोबार संभाला। इसके बावजूद ग्राहक को अपना सोना वापस नहीं मिला।

आखिरकार सितंबर 2025 में राज कुमार ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

सुनार ने कोर्ट में क्या दावा किया?

मामले की सुनवाई के दौरान ज्वैलर्स की ओर से ग्राहक के साथ किसी तरह का लेन-देन होने से इनकार किया गया।

दावा किया गया कि राज कुमार ने उन्हें कोई सोना नहीं दिया था। वहीं मामले में शामिल एक अन्य व्यक्ति ने भी कारोबार से संबंध होने से इनकार किया।

लेकिन ग्राहक ने आयोग के सामने 1 सितंबर 2023 की रसीद पेश कर दी।

यही रसीद पूरे मामले में महत्वपूर्ण सबूत साबित हुई।

Consumer Court:  रसीद ने खोली मामले की पोल

ग्राहक द्वारा पेश की गई रसीद में 32 ग्राम सोना जमा किए जाने का रिकॉर्ड था। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए माना कि ग्राहक ने ज्वैलर को सोना दिया था।

आयोग के सामने रसीद एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में सामने आई, जिसके आधार पर ग्राहक के दावे को मजबूती मिली।

इसके बाद आयोग ने सोना वापस नहीं करने को उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।

Consumer Court:  वारिस भी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते

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मामले में दुकान के पुराने मालिक की मृत्यु के बाद उनके परिवार के सदस्यों द्वारा कारोबार संभालने का पहलू भी सामने आया।

आयोग ने कारोबार संभालने वाले संबंधित पक्षों को ग्राहक की शिकायत के संदर्भ में जिम्मेदारी से बचने की अनुमति नहीं दी।

फैसले में ग्राहक के दावे और उपलब्ध दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए राहत देने का आदेश दिया गया।

Consumer Court:  60 दिन में लौटाना होगा 32 ग्राम सोना

जिला उपभोक्ता आयोग ने 3 अगस्त 2026 के आदेश में संबंधित पक्षों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर 32 ग्राम सोना वापस करने का निर्देश दिया।

यानी ग्राहक को अपना पुराना सोना वापस पाने के लिए अब लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आयोग के आदेश का सहारा मिला है।

यह फैसला उन ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो पुराना सोना देकर नई ज्वैलरी बनवाते हैं।

Consumer Court:  ग्राहक को मिलेगा ₹35 हजार मुआवजा

सिर्फ 32 ग्राम सोना लौटाने का आदेश ही नहीं दिया गया है। आयोग ने ग्राहक को मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए भी मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

मुआवजे का विवरण इस प्रकार है—

  • मानसिक परेशानी के लिए: ₹25,000
  • मुकदमे के खर्च के लिए: ₹10,000
  • कुल मुआवजा: ₹35,000

इस तरह सुनार को ग्राहक का 32 ग्राम सोना लौटाने के साथ-साथ कुल ₹35,000 का भुगतान भी करना होगा।

ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

सोने और आभूषण से जुड़े लेन-देन में ग्राहक के पास दस्तावेजी सबूत होना बेहद महत्वपूर्ण है।

पुराना सोना देकर नई ज्वैलरी बनवाते समय ग्राहक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सुनार से लिखित रसीद जरूर मिले। रसीद में सोने का वजन, उसकी शुद्धता, सामान का विवरण और लेन-देन की तारीख जैसी जानकारी दर्ज होना उपयोगी रहता है।

इस मामले में भी ग्राहक द्वारा सुरक्षित रखी गई रसीद ने उसके दावे को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Consumer Court:  पुराना सोना देते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप पुराने सोने से नई ज्वैलरी बनवाने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी सावधानियां बरत सकते हैं—

1. रसीद जरूर लें

पुराना सोना देते समय वजन और अन्य विवरण वाली रसीद जरूर लें।

2. वजन की पुष्टि करें

सोना जमा करते समय उसके वजन की पुष्टि करें और रसीद पर वजन दर्ज करवाएं।

3. डिलीवरी की तारीख लिखवाएं

नई ज्वैलरी कब तक मिलेगी, इसकी संभावित तारीख लिखित में लेना बेहतर है।

4. भुगतान का रिकॉर्ड रखें

कैश या ऑनलाइन भुगतान करने पर उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

5. बातचीत के सबूत संभालकर रखें

जरूरत पड़ने पर WhatsApp मैसेज, बिल, रसीद और भुगतान संबंधी दस्तावेज उपयोगी हो सकते हैं।

Consumer Court:  कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कब कर सकते हैं?

यदि किसी ग्राहक को खरीदी गई वस्तु या सेवा में कमी का सामना करना पड़ता है और संबंधित कारोबारी समस्या का समाधान नहीं करता, तो उपभोक्ता कानून के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आभूषण से संबंधित मामलों में बिल, रसीद, भुगतान रिकॉर्ड और कारोबारी के साथ हुई बातचीत जैसे दस्तावेज शिकायत को मजबूत कर सकते हैं।

हालांकि प्रत्येक मामले के तथ्य अलग होते हैं और कानूनी प्रक्रिया मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

Consumer Court:  क्या इस फैसले का मतलब सभी मामलों में सोना वापस मिलेगा?

जरूरी नहीं। यह फैसला इस विशेष मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों के आधार पर आया है।

किसी दूसरे मामले में उपभोक्ता आयोग का फैसला अलग हो सकता है। इसलिए इसे हर ज्वैलरी विवाद पर स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं माना जाना चाहिए।

निष्कर्ष

कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ग्राहक के अधिकारों और दस्तावेज संभालकर रखने की अहमियत को सामने लाता है। मामले में ग्राहक ने 32 ग्राम सोना नई ज्वैलरी बनवाने के लिए सुनार को दिया था, लेकिन लंबे समय तक न तो नई अंगूठी मिली और न ही पुराना सोना वापस किया गया।

ग्राहक द्वारा पेश की गई रसीद को महत्वपूर्ण सबूत माना गया और आयोग ने संबंधित पक्षों को 60 दिनों के भीतर 32 ग्राम सोना लौटाने का आदेश दिया। इसके साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000 और कानूनी खर्च के लिए ₹10,000 यानी कुल ₹35,000 मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध अदालती/उपभोक्ता आयोग संबंधी जानकारी के आधार पर सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी व्यक्तिगत कानूनी विवाद में निर्णय लेने से पहले योग्य कानूनी सलाह लेना उचित है।

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