30 फीट ऊंची पानी की टंकी भरते ही गिरी, जल जीवन मिशन के काम पर उठे सवाल
मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के जनपद पंचायत नईगड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत खटखरी में जल जीवन मिशन के तहत बन रही लगभग 30 फीट ऊंची पानी की टंकी पहली ही बार पानी भरते ही भरभराकर गिर गई। यह घटना देर शाम की बताई जा रही है, जब टंकी में टेस्टिंग के लिए पानी भरा गया था। रात होते-होते पूरी संरचना अचानक ढह गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, जबकि पास में ही एक जेसीबी चालक मशीन पर सो रहा था, जो बाल-बाल बच गया।
यह घटना न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।

30 फीट ऊंची पानी की टंकी पहली ही बार पानी भरते ही भरभराकर गिर गई।
पहले से मिल रही थीं शिकायतें, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस पानी की टंकी को लेकर पहले से ही कई शिकायतें की जा चुकी थीं। कलेक्टर कार्यालय से लेकर भोपाल स्थित मंत्रालय तक इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इतना ही नहीं, इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया गया था।
हालांकि, जवाब में यह बताया गया कि कार्य पूर्ण हो चुका है और सब कुछ नियमानुसार है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली। टंकी के गिरने से यह स्पष्ट हो गया कि निर्माण कार्य में गंभीर खामियां थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।
लीकेज की शिकायत के बाद भरा गया था पानी
ग्राम पंचायत के सरपंच सुरेश कुमार जायसवाल के अनुसार, टंकी में पहले से ही लीकेज की समस्या थी, जिसे हाल ही में ठीक कराया गया था। इसके बाद टंकी की जांच के लिए उसमें पानी भरा गया।
लेकिन जैसे ही टंकी में पानी भरा गया, उसकी संरचना दबाव नहीं झेल सकी और देर रात वह पूरी तरह से ढह गई। यह दर्शाता है कि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और तकनीक मानकों के अनुरूप नहीं थी।
घटिया निर्माण सामग्री और भ्रष्टाचार के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि टंकी के निर्माण में बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी संरचना में 8 एमएम जैसी पतली सरिया का इस्तेमाल किया गया, जो इस तरह के निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध भ्रष्टाचार का मामला है। कागजों में काम पूरा दिखाकर भारी रकम निकाल ली गई, जबकि जमीनी स्तर पर काम अधूरा और कमजोर रहा।
50 Crore से अधिक की योजनाएं, फिर भी नहीं मिला पानी
मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कई पानी की टंकियों और पाइपलाइन परियोजनाओं को पूरा दिखाया गया है। लेकिन हकीकत यह है कि कई गांवों में आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
खटखरी की यह घटना उसी कड़ी का एक उदाहरण है, जहां कागजों में विकास दिखाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजे शून्य हैं।
8 MM सरिया से बना Tank? Structural Failure तय था
स्थानीय लोगों का आरोप है कि construction में 8 mm thin steel rods (सरिया) का इस्तेमाल किया गया, जबकि इतनी ऊंची RCC tank के लिए heavy reinforcement जरूरी होता है।
👉 Civil engineering norms के अनुसार:
- Larger tanks में typically 10 mm – 16 mm या उससे ज्यादा diameter की steel bars इस्तेमाल होती हैं
- लेकिन यहां low-grade material use होने का आरोप है
यानी अगर load calculation और material strength match न करे तो:
👉 Load > Strength = Collapse (Failure Condition)
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इस लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या निर्माण एजेंसी, निगरानी करने वाले अधिकारी या फिर पूरी व्यवस्था इस विफलता के लिए जिम्मेदार है?
अब जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और लोगों का भरोसा सरकारी योजनाओं पर बना रहे।
- Mauganj Water Tank Collapse
- Jal Jeevan Mission Failure
- Khatkharri Tank Accident
- MP Water Tank News
- Construction Quality Issue India
- Rural Water Scheme Scam
- Water Tank Collapse Reason
- Government Scheme Failure
- Poor Construction Material
- 30 Feet Tank Collapse












Leave a Reply