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रीवा में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी का ‘Surprise Ground Visit’, VIP Culture को कहा अलविदा

नरेंद्र सूर्यवंशी का ‘Surprise Ground Visit’, VIP Culture को कहा अलविदा

रीवा जिले में नवागत कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पदभार संभालते ही अपनी कार्यशैली से प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आमतौर पर जहां नए अधिकारी पहले दिन कार्यालय में बैठकों और औपचारिकताओं में व्यस्त रहते हैं, वहीं सूर्यवंशी ने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना। उन्होंने सीधे ground reality check करने का फैसला लिया—वो भी बिना किसी VIP protocol के।

 

सीधे जनता के बीच पहुंचे कलेक्टर

रात में पहुंचे, सुबह बन गए आम यात्री 

देर रात रीवा पहुंचने के बाद ही कलेक्टर सूर्यवंशी ने जिले की वास्तविक स्थिति समझने का मन बना लिया था। अगली सुबह, जब अधिकारी उनके कार्यालय पहुंचने का इंतजार कर रहे थे, तब कलेक्टर साहब चुपचाप एक आम tourist bus में सवार होकर जवा की ओर निकल पड़े। इस दौरान न कोई सुरक्षा घेरा था, न कोई सरकारी काफिला—सिर्फ एक आम नागरिक की तरह यात्रा।

उनका यह कदम न केवल चौंकाने वाला था बल्कि यह एक मजबूत संदेश भी देता है कि अब प्रशासनिक कामकाज में transparency और accountability को प्राथमिकता दी जाएगी।

ऑफिस नहीं, सीधे जनता के बीच पहुंचे कलेक्टर 

जहां उन्हें कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों के साथ मीटिंग करनी थी, वहां उन्होंने सीधे ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करना बेहतर समझा। इस दौरान उन्होंने तहसील कार्यालय, SDM ऑफिस, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का अचानक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया बल्कि आम लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। कई जगहों पर उन्हें योजनाओं के क्रियान्वयन में खामियां भी नजर आईं, जिन्हें उन्होंने तुरंत सुधारने के निर्देश दिए।

Surprise Inspection से मचा हड़कंप

जैसे ही कलेक्टर के अचानक ग्रामीण इलाकों में पहुंचने की खबर प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंची, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। अधिकारी तुरंत सक्रिय हो गए और व्यवस्थाओं को सुधारने में जुट गए। यह साफ दिखा कि बिना सूचना के किए गए इस दौरे ने सिस्टम की असली तस्वीर सामने ला दी।

यह कदम प्रशासनिक ढांचे में real-time monitoring और on-ground evaluation की जरूरत को भी उजागर करता है।

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“कलेक्टर का काम जनता के बीच जाना है” – सूर्यवंशी

कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने अपने इस फैसले पर कहा कि एक कलेक्टर का असली काम सिर्फ ऑफिस में बैठकर फाइलें निपटाना नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना है।

उन्होंने कहा, 

“मेरा उद्देश्य यह देखना है कि सरकार की योजनाएं लोगों तक सही तरीके से पहुंच रही हैं या नहीं। इसलिए मैंने तय किया कि मैं सीधे जनता के बीच जाऊं और बिना किसी औपचारिकता के स्थिति को समझूं।” 

उन्होंने आगे कहा कि जहां भी कमियां मिलेंगी, उन्हें तुरंत दूर किया जाएगा और प्रशासन को ज्यादा responsive और people-friendly बनाया जाएगा।

VIP Culture खत्म करने की पहल

कलेक्टर सूर्यवंशी का यह कदम एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। आमतौर पर VIP culture के कारण अधिकारी और जनता के बीच एक दूरी बन जाती है, लेकिन इस पहल से वह दूरी कम होती नजर आ रही है।

उनका यह approach प्रशासन को ज्यादा accessible, transparent और result-oriented बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जनता में उत्साह, अधिकारियों में संदेश

इस अनोखे दौरे के बाद जहां आम जनता में उत्साह देखने को मिला, वहीं अधिकारियों के लिए यह एक clear message है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कामकाज में सुधार और जिम्मेदारी तय करना अब प्रशासन की प्राथमिकता होगी।

रीवा में बदल सकती है प्रशासनिक कार्यशैली 

कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी की इस पहल से यह साफ हो गया है कि रीवा में प्रशासनिक कार्यशैली में बड़ा बदलाव आने वाला है। उनका focus साफ है—good governance, transparency और public engagement

यदि इसी तरह के surprise visits और ground inspections जारी रहे, तो आने वाले समय में जिले में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और जनता की समस्याओं का तेजी से समाधान संभव हो सकेगा।

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