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“रीवा CMHO में Budget Game? बिना Tender करोड़ों खर्च पर सवाल”

“Rewa CMHO Office में Budget Game? बिना Tender करोड़ों खर्च पर सवाल”

रीवा CMHO दफ्तर में बजट खर्च पर सवाल, दवा खरीदी और टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के रीवा जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। मामला वित्तीय वर्ष के अंत यानी मार्च एंडिंग में बजट खर्च करने के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर की गई खरीदारी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में करोड़ों के बजट को ठिकाने लगाने के लिए अनियमित तरीके अपनाए गए।

सबसे बड़ा सवाल दवाइयों की खरीदी को लेकर उठ रहा है। राज्य शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि आवश्यक दवाएं मेडिकल कॉर्पोरेशन के माध्यम से खरीदी जाएं, लेकिन रीवा स्वास्थ्य विभाग ने इन निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए जेम (GeM) पोर्टल के जरिए लाखों रुपये की दवाइयां खरीद लीं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब कॉर्पोरेशन में दवाइयां उपलब्ध थीं, तो बाहर से खरीदी क्यों की गई? क्या यह केवल बजट समाप्त करने की जल्दबाजी थी या इसके पीछे कमीशन का कोई बड़ा खेल छिपा है?

अनियमितताओं की सूची यहीं खत्म नहीं होती। जिला स्टोर के संचालन पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में वरिष्ठ स्टोरकीपर मौजूद होने के बावजूद स्टोर का प्रभार एक( फार्मासिस्ट ग्रेड-2) को सौंपा गया है। इससे यह सवाल उठता है कि योग्य अधिकारियों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मचारियों को जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है?

स्टोर में बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के पुताई जैसे सिविल कार्य कराए जाने के आरोप हैं।

वहीं कंप्यूटर, कुर्सी, टेबल और अलमारियों की खरीदी में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। यह सब ऐसे समय में हुआ जब सरकारी खरीद के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य होती है।

एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि जेडी ऑफिस में पदस्थ आर.के. शुक्ल जिला स्टोर में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर किस आदेश के तहत एक अन्य कार्यालय का कर्मचारी यहां कार्य कर रहा है

और उसे यह अधिकार किसने दिया

रीवा CMHO दफ्तर में बजट खर्च पर सवाल, दवा खरीदी और टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर आरोप

जब इस पूरे मामले पर CMHO डॉ. यत्नेश त्रिपाठी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और मामला पीआरओ के पास भेज दिया। वहीं पीआरओ ने भी जानकारी न होने की बात कहते हुए फाइल देखने के बाद ही कुछ कहने की बात कही। यह स्थिति विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।एक ही

परिसर में कार्यालय और स्टोर होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों का अनजान होना कई शंकाओं को जन्म देता है।

इससे यह प्रतीत होता है कि विभाग में पारदर्शिता की कमी है और मामले को टालने की कोशिश की जा रही है।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन के निर्देशों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? क्या कलेक्टर रीवा और स्वास्थ्य संचालनालय इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?

“Rewa CMHO Office में Budget Game? बिना Tender करोड़ों खर्च पर सवाल”

“Rewa CMHO Office में Budget Game? बिना Tender करोड़ों खर्च पर सवाल”

जनता के टैक्स के पैसे से जुड़े इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि इस कथित अनियमितता पर प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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