Advertisement

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : कब्ज, बवासीर और फिशर का बढ़ सकता है खतरा

टॉयलेट में ज्यादा जोर? हो जाएं सावधान, बढ़ सकता है बवासीर-फिशर का खतरा

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी :   टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना क्यों हो सकता है खतरनाक?

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : कब्ज, बवासीर और फिशर का बढ़ सकता है खतरा

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी :

सुबह टॉयलेट जाना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन कई लोगों को मल त्याग के दौरान काफी जोर लगाना पड़ता है। अगर यह कभी-कभार हो तो अलग बात है, लेकिन बार-बार या लंबे समय तक जोर लगाना कब्ज और दूसरी परेशानियों का संकेत हो सकता है।

कब्ज में मल कठोर या सूखा हो सकता है और उसे बाहर निकालने में परेशानी होती है। ऐसे में व्यक्ति बार-बार जोर लगाने लगता है। लंबे समय तक यह आदत बनी रहने पर गुदा के आसपास दबाव बढ़ सकता है और बवासीर या एनल फिशर जैसी समस्या हो सकती है।

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी :  जोर लगाने से बढ़ सकता है बवासीर का खतरा

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : कब्ज, बवासीर और फिशर का बढ़ सकता है खतरा

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी :

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाने से निचले मलाशय और गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है। इससे बवासीर यानी Hemorrhoids की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।

बवासीर होने पर मल त्याग के दौरान या उसके बाद चमकीले लाल रंग का खून दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों को गुदा के आसपास खुजली, जलन, सूजन या दर्द भी हो सकता है। लंबे समय तक कब्ज और टॉयलेट पर ज्यादा देर बैठना भी बवासीर के जोखिम से जुड़ा है।

इसलिए अगर हर दिन टॉयलेट में काफी देर तक बैठना पड़ रहा है या मल निकालने के लिए लगातार जोर लगाना पड़ता है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : एनल फिशर भी बन सकता है परेशानी का कारण

ज्यादा जोर लगाने की वजह से एनल फिशर यानी गुदा की अंदरूनी त्वचा में छोटी दरार या कट भी हो सकता है। कब्ज और कठोर मल एनल फिशर के सामान्य कारणों में शामिल हैं।

एनल फिशर होने पर टॉयलेट करते समय तेज दर्द या जलन हो सकती है। इसके अलावा टॉयलेट पेपर या मल पर चमकीले लाल रंग का खून भी दिखाई दे सकता है।

अगर फिशर ठीक नहीं होता और व्यक्ति लगातार जोर लगाता रहता है तो समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसलिए दर्द या खून आने की समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : कब्ज क्यों होती है?

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : कब्ज, बवासीर और फिशर का बढ़ सकता है खतरा

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी :

कब्ज के कई कारण हो सकते हैं। खाने में फाइबर की कमी, पर्याप्त पानी न पीना और शारीरिक गतिविधि कम होना इसके सामान्य कारणों में शामिल हैं। कुछ दवाएं और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी कब्ज का कारण बन सकती हैं।

कब्ज के दौरान व्यक्ति को मल त्याग करने में ज्यादा समय लग सकता है। मल कठोर या गांठदार हो सकता है और ऐसा महसूस हो सकता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ है।

यही परेशानी आगे चलकर बार-बार जोर लगाने की आदत पैदा कर सकती है।

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी :टॉयलेट में कितनी देर बैठना चाहिए?

टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा देर तक बैठे रहना भी अच्छी आदत नहीं है। खासकर मोबाइल लेकर लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहने से बचना चाहिए।

लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने से गुदा के आसपास की नसों पर दबाव बढ़ सकता है और यह बवासीर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।

इसलिए शरीर का संकेत मिलने पर टॉयलेट जाएं, लेकिन वहां अनावश्यक रूप से लंबे समय तक न बैठें और मल त्याग के लिए जरूरत से ज्यादा जोर न लगाएं।

पानी और फाइबर से मिल सकती है राहत

कब्ज से बचने के लिए खान-पान पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और भोजन में फाइबर बढ़ाने से मल को नरम रखने में मदद मिल सकती है।

फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। फाइबर को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर माना जाता है।

इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी कब्ज से बचाव में मदद कर सकती है।

टॉयलेट जाने की इच्छा को न रोकें

जब शरीर मल त्याग का संकेत देता है तो उसे बार-बार रोकना भी कब्ज की समस्या को बढ़ा सकता है। नियमित समय पर टॉयलेट जाने की आदत और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करना फायदेमंद हो सकता है।

एनल फिशर से बचाव के लिए भी कब्ज को नियंत्रित रखना और मल को नरम रखना महत्वपूर्ण है।

खून आए तो खुद से इलाज न करें

टॉयलेट के दौरान खून आना हमेशा सिर्फ बवासीर या फिशर की वजह से हो, ऐसा जरूरी नहीं है। रेक्टल ब्लीडिंग के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए बार-बार खून आने, लगातार दर्द रहने या समस्या ठीक न होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

अगर कब्ज कई सप्ताह तक बनी रहती है या इसके साथ खून, वजन कम होना या तेज पेट दर्द जैसी समस्या है, तो मेडिकल सलाह लेना जरूरी है।

टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है भारी : इन आसान आदतों से बच सकते हैं समस्या से

  • पर्याप्त पानी पिएं।
  • खाने में फाइबर युक्त चीजें शामिल करें।
  • रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि करें।
  • मल त्याग की इच्छा को न रोकें।
  • टॉयलेट में ज्यादा जोर न लगाएं।
  • लंबे समय तक टॉयलेट पर न बैठें।
  • कब्ज को लगातार नजरअंदाज न करें।
  • दर्द या खून आने पर डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

टॉयलेट में कभी-कभार परेशानी होना अलग बात है, लेकिन हर दिन मल त्याग के लिए ज्यादा जोर लगाना सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। कब्ज इसका एक कारण हो सकता है और लगातार जोर लगाने से बवासीर तथा एनल फिशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पर्याप्त पानी, फाइबर, नियमित गतिविधि और सही टॉयलेट आदतें कब्ज से बचाव में मदद कर सकती हैं।

नोट: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। लगातार कब्ज, तेज दर्द, बार-बार खून आने या अन्य गंभीर लक्षणों में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

Share on social media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *