Major Expansion of Health Services in UP: उत्तर प्रदेश में मरीजों के बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा नेटवर्क का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। ट्रॉमा टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। लखनऊ: सड़क हादसा या गंभीर इमरजेंसी होने पर मरीजों को जल्द से जल्द इलाज मुहैया करवाने के लिए यूपी में ट्रॉमा नेटवर्क का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है।
Major Expansion of Health Services in UP: 11 मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे KGMU जैसे ट्रॉमा सेंटर, 173 तक पहुंचेगी संख्या

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को बेहतर एवं समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशव्यापी ट्रॉमा नेटवर्क विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की ट्रॉमा टास्क फोर्स ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें प्रदेश में ट्रॉमा सेंटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 173 करने का प्रस्ताव रखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक ट्रॉमा सुविधाओं से लैस किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सड़क हादसों और गंभीर चोटों के मामलों में “गोल्डन ऑवर” के भीतर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है, जिससे मृत्यु दर को कम किया जा सके।
Major Expansion of Health Services in UP: 9 जिलों में विकसित होंगे लेवल-1 के 11 ट्रॉमा सेंटर

वर्तमान में प्रदेश में केवल लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में ही लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर संचालित है। नई योजना के तहत 9 जिलों में कुल 11 लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर विकसित किए जाएंगे। इनमें लखनऊ के पीजीआई और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान के अलावा आगरा, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, झांसी, प्रयागराज, ग्रेटर नोएडा और इटावा सैफई के प्रमुख मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
इन ट्रॉमा सेंटरों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों, उन्नत ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और आपातकालीन सेवाओं से लैस किया जाएगा ताकि गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार मिल सके।
Major Expansion of Health Services in UP: लेवल-2 और लेवल-3 ट्रॉमा सेंटरों को भी मिलेगा विस्तार

योजना के तहत प्रदेश के 36 जिलों में स्थित जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित लेवल-2 ट्रॉमा सेंटरों को पूरी तरह सक्रिय किया जाएगा। यहां 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं, ब्लड बैंक, आईसीयू और आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे के निकट स्थित 19 जिला अस्पतालों, 15 टर्शियरी सेंटरों और 92 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर उनकी स्थिति स्थिर करना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च स्तरीय केंद्रों में रेफर करना होगा।
Major Expansion of Health Services in UP: तीन चरणों में लागू होगी योजना
प्रदेश सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन चरणों में लागू करेगी। पहले चरण में चिकित्सा कर्मियों और अन्य आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दूसरे चरण में एम्बुलेंस नेटवर्क को मजबूत करने के साथ चिकित्सा कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीसरे चरण में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरणों की खरीद की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य अगले तीन से पांच वर्षों के भीतर पूरे ट्रॉमा नेटवर्क को विकसित कर प्रदेश के हर क्षेत्र तक आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
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बनेगा अत्याधुनिक ट्रॉमा कमांड सेंटर
योजना के अंतर्गत प्रदेश में एक केंद्रीकृत ट्रॉमा कमांड सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। इस सेंटर की हेल्पलाइन या टोल-फ्री नंबर पर कॉल करने पर घायलों को उनके नजदीकी ट्रॉमा सेंटर की जानकारी दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस मौके पर भेजी जाएगी।
सरकार ने ट्रॉमा नेटवर्क के लिए प्रदेशभर में करीब 1200 ALS एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इससे दुर्घटना स्थल से अस्पताल तक मरीजों को जीवन रक्षक सुविधाओं के साथ पहुंचाया जा सकेगा।
पुराने भवनों में ही विकसित होंगी नई सुविधाएं
इस योजना की एक खास बात यह है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर नई इमारतों के निर्माण की आवश्यकता नहीं होगी। मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की मौजूदा इमारतों को ही अपग्रेड कर ट्रॉमा सेंटरों में परिवर्तित किया जाएगा। इससे निर्माण लागत में भारी बचत होगी और परियोजना को तेजी से लागू किया जा सकेगा।
अपर मुख्य सचिव अमित घोष के अनुसार, प्रदेश में ट्रॉमा नेटवर्क को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस योजना पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी और हजारों मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।













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